नागफनी
नागफनी चलते धरती पर खोजे थे चिन्ह क़यामत के पांवो की , सब कुछ बिसरा बिसरा दिखता झाड़ बचे थे नागफनी के . हर पल विहँसे खिलकर महके ना डर ना परवाह खिंजा की , पुरवाई की राह न देखे शांखे गुलिस्ताँ नागफनी की . दरिया चाहे विद्रुम मुक्ता कमल कुमुदिनी ताल को प्यारी ठुकराए जब शस्य श्यामला , बनती सिक्ता, जननी नागफनी की . रत्न जड़ित पारितोषिक जग की दुनिया ने सर आँख लगाईं , मेरे छोटी सी नगरी की चाह चमन बस नागफनी की . ...